The full ritual for each station involves a specific sequence: the Khamasaman Iriyavahiyam , and the specific (hymn) and
रायण हेठे प्रभुजी बैट्ठा, समवसरण नी रीते,प्रथम केवलज्ञान पा म्या, आदिनाथ अणी प्रीते;कोटि देव परिवा रशुं, देशना दे जगनाथ,चरण कमल नी सेवा करतां, मळे अविचल साथ।
मुख्य टूंक के भीतर आदिनाथ प्रभु के गर्भगृह के ठीक बाहर प्राचीन रायण (खिरनी) का वृक्ष है। इसी वृक्ष के नीचे प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) ने समवसरण किया था और साधना की थी। यहाँ उनके चरण पादुका (पगलिया) विराजमान हैं।
"आदि जिनेश्वर नेमुडो, पास बयासम वंदू; भरतक्षेत्र ना मंडण, पाप समूह खंडू।"
द्वितीय चैत्य — ज्ञान का वंदन दूसरे चैत्य को नमन, ज्ञान दीप से उजियारा अटल। विचारों के अंधकार हरता, मोक्ष-सूत्र जहाँ हुआ वाजल॥ ॐ नमो ज्ञानदायिने palitana 5 chaityavandan in hindi full
5. श्री आदिनाथ भगवान (Shri Adinath Bhagwan)
"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे; भाव धरीने जे चढे, तेने भव पार उतारे. अनंत सिद्धनो ऐह ठाम, सकल तीर्थनो राय; पूर्व नवनु ऋषभदेव, ज्यांईं ठविया प्रभुपाय."
, 'नमत्थुणं' का पाठ करें।
: Climbing the ~3,500 steps is a symbolic journey toward enlightenment. The full ritual for each station involves a
5. भगवान आदिनाथ का चैत्यवंदन (पाँचवा वंदन)
99 yatra 5 chaityavandan – The Jainsite World's Largest Jain Website. Step-by-Step Chaityavandan Ritual | PDF - Scribd
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अंतिम मंगल पाठ के साथ चैत्यवंदन पूर्ण करें। छे पगलां मनोहार
पाँचवाँ चैत्यवंदन यात्रा के अंतिम चरण में किया जाता है। इस चैत्यवंदन में सभी पाँचों चैत्यवंदनों का सार समाहित होता है और भक्त अपनी यात्रा को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
"आदिजिनेश्वर रायना, छे पगलां मनोहार; भावसहित भक्ति करे, पहोंचाडे भवपार।"
सभी स्तुतियों का शुद्ध उच्चारण करें, जिससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।